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Nancy Pelosi: जानिए आखिर कौन हैं 82 वर्षीय नैंसी, जिनके ताइवान दौरे से भड़का ड्रैगन

by Manika
Nancy Pelosi: जानिए आखिर कौन हैं 82 वर्षीय नैंसी, जिनके ताइवान दौरे से भड़का ड्रैगन

इस समय अमेरिका और चीन के बीच भारी तनाव चल रहा है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया है । जिसके बाद से नैंसी दक्षिण कोरिया के लिए रवाना हो गई हैं। आपको बता दें कि नैंसी पेलोसी ने ताइवान की धरती से चीन को कड़ी चेतावनी देकर उसकी चिंता और ज्यादा बढ़ा दी है।

उन्होंने अपने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ताइवान का साथ नहीं छोड़ेगा। यह पहली बार नहीं है जब नैंसी के दौरे से चीन को इस तरीके की परेशानी हुई हो। करीब 14 साल पहले नैंसी जब भारत दौरे पर आई थी। तब भी चीन की हालत कुछ ऐसी ही थी। तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर कौन है नैंसी। जिन्होंने चीन का जीना हराम कर रखा है।

अमेरिका राजनीति में अग्रसर है नैंसी पेलोसी


जानकारी के लिए आपको बता दें नैंसी पेट्रीसिया पेलोसी का जन्म 26 मार्च 1940 को हुआ था। डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नैंसी, जनवरी 2019 से ही अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी कि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की 52 वीं स्पीकर है। अमेरिका में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बाद हाउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव का स्पीकर राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा ताकतवर माना जाता है।

इस पद को संभालने वाली वह अमेरिका की पहली महिला नेता है। अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में नैंसी के नाम पर कई सारी उपलब्धियां दर्ज है। वह कम से कम तीन दशक से ज्यादा समय से अमेरिकी सांसद की सदस्य हैं। अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक राजनीति पर भी नैंसी ने अपना गहरा असर छोड़ा है। साल 2005 के अगर बात करें

तो आपको बता दें कि साल 2005 में बुश प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा का आंशिक रूप से निजीकरण करने की काफी कोशिश की थी। तब अमेरिका सरकार का पुरजोर विरोध किया गया था। नैंसी पेलोसी ने 24 सितंबर 2019 को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की सुनवाई शुरू करने की घोषणा की थी। जिसके बाद नैंसी को अमेरिका के उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के रेस में दूसरे नंबर पर माना जाता है।

लगभग 30 सालों से चाइना की दुश्मन बनी हुई है नैंसी पेलोसी


नैंसी पेलोसी से चीन की करीब 30 साल पुरानी दुश्मनी है। साल 1979 में चीन सरकार ने जब बीजिंग में हो रहे एक बड़े विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया था। तब इसके बाद 1991 में नैंसी पेलोसी ने तिएनेन्मन स्क्वायर पर चीन के खिलाफ बैनर लहराया था। यह बैनर चीनी सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए प्रदर्शनकारियों के समर्थन में था।

चीन के इस कदम को लेकर नैंसी काफी ज्यादा आक्रामक थी। चीन ने नैंसी के इस कदम की काफी निंदा भी की थी। साथियों की कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद से चीन नैंसी पॉलिसी से लगातार नफरत करता है और अब नैंसी ने ताइवान का दौरा करके एक बार फिर से चीन की वह यादें ताजा कर दी है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि चीन ताइवान पर इस बात का दावा करता है कि चीन जरूरत पड़ी तो वह ताइवान को अपने आप में शामिल कर लेगा। यही वजह है कि ताइवान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता देने वाले देशों से भी चीन इस समय काफी ज्यादा चढ़ा हुआ है।

चीन के खिलाफ निंदा का प्रस्ताव

1979 की घटना के बाद नैंसी पेलोसी ने चीन सरकार के दमन के खिलाफ अमेरिकी संसद में निंदा का प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी। जिसमें वह सफल भी हुई इसी साल तिएनेन्मन स्क्वायर हिंसा की 33वीं बरसी पर नैंसी ने चीन के खिलाफ बयान भी दिया था। उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन को बलपूर्वक दबाने की चीन के रुख को राजनीतिक दुस्साहस करार दिया था। इसके साथ ही उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को अत्याचारी भी बताया था।

मानव अधिकार उल्लंघन पर गुस्से पर है नैंसी
नैंसी पेलोसी चीन में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर काफी ज्यादा मुखर है। साल 2000 की बात है। जब उनकी तत्कालीन उप राष्ट्रपति हु जिंताओ के साथ एक बैठक की और इस बैठक में नैंसी ने चीनी उप राष्ट्रपति को एक पत्र सौंपने की कोशिश की थी। इस पत्र में चीन और तिब्बत के मानव अधिकार कार्यकर्ताओं पर हो रहे जुल्मों का भी जिक्र किया गया था।

साथ ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर की भी चिंता व्यक्त की थी। इस बात पर उन्होंने उनकी रिहाई की भी मांग की थी। हालांकि आपको बता दें कि उस समय पर राष्ट्रपति ने पत्र नहीं लिया था। 7 साल बाद जब हु जिंताओ राष्ट्रपति बने तो नैंसी ने फिर उन्हें पत्र भेजा। इस पत्र में भी उन्होंने चीनी सरकार द्वारा फर्जी तरीके से गिरफ्तार किए गए

राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की थी। इन कैदियों ने लिए किया जिसमें वो भी शामिल थे जिन्होंने साल 2010 में शांति का नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया था। लेकिन चीन ने उन्हें नार्वे जाकर पुरस्कार लेने की अनुमति नहीं दी थी।

चीन में ओलंपिक आयोजन पर विरोध


जानकारी के लिए आपको बता दें कि चीन में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर नैंसी काफी लंबे समय से आवाज उठा रही हैं। और इसी के आधार पर उन्होंने चीन में ओलंपिक खेलों के आयोजन पर कभी भी अपना समर्थन नहीं दिया है। वह लगातार इस बात का विरोध कर रही है। साल 2008 में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से चीन जाकर ओलंपिक का उद्घाटन ना करने का अनुरोध भी किया था। हालांकि बुश ने उनके अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया था और इस पर नैंसी ने बीजिंग में विंटर ओलंपिक्स के राजनयिक बहिष्कार की वैश्विक मुहिम चलाई थी।

चीन में मुसलमानों का उत्पीड़न
कई बार नैंसी मुसलमानों के उत्पीड़न को मुद्दा बना चुकी है। विंटर ओलंपिक्स के बहिष्कार के पीछे भी उन्होंने विगत मुसलमानों के उत्पीड़न को आधार बनाया था। उनकी मुहिम पर ही अमेरिका ने इस बार बीजिंग में मीटर ओलंपिक का बहिष्कार किया था। नैंसी कई अंतरराष्ट्रीय मैचों पर चीन को घेरने का प्रयास कर चुकी है। यही वजह है कि नैंसी का नाम आते ही चीन की चिंता बढ़ जाती है। हालांकि चीन नैंसी पर कई तरह के झूठ बोलने के आरोप भी लगा चुका है।

14 साल पहले किया था भारत का दौरा


करीब 14 साल पहले साल 2008 में नैंसी पेलोसी ने भारत का दौरा किया था इस दौरे में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी और साथ ही धर्मशाला जाकर तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा के साथ मुलाकात भी की थी। चीन दलाई को अपना दुश्मन मानता रहा है यही वजह है कि दलाई लामा ने नैंसी की मुलाकात का चीन ने काफी विरोध भी किया था। बावजूद नैंसी ने दलाई लामा से मुलाकात की और साल 2017 में नैंसी दोबारा भारत आई और इस बार भी उन्होंने चीन की चिंता को दरकिनार करते हुए दलाई लामा के साथ मुलाकात की।

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